नए वर्ष की सुभकामनाएँ
दोस्तों आज इस भागमभाग भरी जिन्दगी में शायद हमें एक दुसरे के लिए कहाँ वक्त मिल पाता होगा ? है न ? पर नहीं ..... हम भले ही वक्त न निकालना चाहें पर क्या है की वक्त भी न जाने किस मिटटी का बना होता जो हर हाल में हर जगह अपने हिसाब से स्पेस निकाल ही लेता है , तभी तो ...... आज अभी इस वक्त आप मुझसे मुखातिब हैं . आप कहेंगे ये क्या बात हुई मुखातिब तो मैं हूँ आप से .....हा .....हा .....हा.
सुभाष नैण
राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
रामगढ
शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010
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